बलरामपुर-* जिले के कोदौरा गांव से करीब 60 से 70 एकड़ जमीन फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है. जिसके विरोध में कई अन्य गांवों केसैकड़ों ग्रामीणों ने बैठक की और फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड के खिलाफ कार्यवाही और ग्रामीणों की जमीन को वापस दिलाने की बात रखी. इधर मौकेपर मौजूद राजपुर तहसीलदार ने ग्रामीणों की जमीन संबंधी समस्याओं को सुना और हफ्ते भर के भीतर जांच कर कार्यवाही का आश्वासन दिया है.

ग्रामीणों का आरोप है कोदौरा निवासी विजय गुप्ता राजस्व विभाग के कर्मचारियों से मिलीभगत कर करीब दो दर्जन से ज्यादा ग्रामीणों की 60 से 70 एकड़ जमीन को अपने और अपने परिवार के नाम पर रजिस्ट्री करवा ली है, और ग्रामीणों का जमीन से मालिकाना हक भी समाप्त हो चुका है, क्योंकिअब रिकॉर्ड में ग्रामीणों का नाम ही नही है. राजस्व रिकार्ड में छेड़खानी करते हुए विजय गुप्ता गांव से लगे कुछ फारेस्ट की जमीन का कथित तौर परवनाधिकार पत्र भी बनवा लिया है. ये खेल विजय गुप्ता द्वारा पिछले कई वर्षों से किया जा रहा था. जिसमे राजस्व विभाग के कर्मचारियों के शामिलहोने का पूरा अंदेशा लगाया जा रहा है. अब गांव के कुछ ऐसे भी ग्रामीण है जिनके पास कोई जमीन भी नही बची है. वहीं मौके पर पहुंची राजपुर कीतहसीलदार ने ग्रामीणों को एक हप्ते के भीतर जांच के बाद कार्यवाही का भरोसा दिलाया है.

  • पटवारी ने कहातहसीलदार के बिना संभव नहीं

हल्का पटवारी का कहना है कि जमीन नामांतरण की प्रक्रिया बगैर पटवारी तहसीलदार के नही हो सकती. मौजूदा हल्का पटवारी का कहना है किजमीन के नामांतरण का खेल बगैर तहसीलदार के संभव नही है, और यह सब प्रकरण उनकी पदस्थापना से पहले का है. पटवारी ने संदेह व्यक्त करतेहुए कहा कि यह सब खेल 2019 से खेला जा रहा है, खैर हल्का पटवारी भी इस पूरे मामले में संदेह के दायरे में है।

बहरहाल, सवाल यही है की गरीब किसानों की पुस्तैनी जमीन का मालिक राजस्व रिकार्ड में विजय गुप्ता और उसका परिवार के कैसे हो गया, क्याराजस्व विभाग भी इस पूरे खेल में शामिल है? ऐसे में अब देखने वाली बात है कि जांच के बाद ग्रामीणों के राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त करने की कार्यवाहीआसानी से कर दी जाती है या फिर ग्रामीणों को तहसील से लेकर कलेक्टर दफ्तर के चक्कर काटने के लिये मजबूर होना पड़ेगा।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *