रायपुर/कोरबा – विशेष रिपोर्ट – कोरबा जिले में SECL के पंप ऑपरेटर दीनदयाल गुप्ता (59) पर लगे गंभीर आरोपों ने पुलिस से लेकर उद्योग प्रबंधनतक हलचल मचा दी है। नौकरी देने के नाम पर 2 लाख रुपये की ठगी, शोषण की कोशिश, केस वापस लेने का दबाव और अब फर्जी पिता का नामबताकर नौकरी हासिल करने की चौंकाने वाली जानकारी सामने आने के बाद मामला बेहद संवेदनशील हो गया है। नौकरी दिलाने के नाम पर 5 लाख की मांग, 2 लाख लेकर किया धोखा — युवती का आरोप आदिवासी पीड़िता के अनुसार, SECL के कर्मचारी ने 5 लाख में नौकरी दिलाने का लालच दिया। युवती ने जमीन गिरवी रखकर 2 लाख रुपये दे भीदिए, लेकिन न नौकरी मिली और न ही पैसे वापस। उल्टा आरोपी 3 लाख और मांगने लगा। “रात बिताने” का दबाव, विरोध करने पर जबरन शोषण की कोशिश पीड़िता ने बताया कि रुपये मांगने पर आरोपी ने उसे अपने घर बुलाकर एक रात साथ बिताने का शर्मनाक प्रस्ताव रखा। विरोध करने पर जबरनशोषण की कोशिश की। SP के निर्देश पर FIR, पर गिरफ्तारी अब तक नहीं—उठ रहे सवाल पुलिस कप्तान सिद्धार्थ तिवारी के आदेश पर आरोपी के खिलाफ BNS धारा 318(4) व 74 के तहत अपराध दर्ज किया गया। लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। थाना स्टाफ पर दबाव बनाने का आरोप — “केस वापस लो, नहीं तो फँसा देंगे” पीड़िता का आरोप है कि: आरोपी और उसका बेटा केस वापस लेने का दबाव डाल रहे हैं थाना कर्मचारी CS वैष्णव ने निजी नंबर से कॉल कर धमकाया आरोपी का दावा: “हमइतना पैसा लगा चुके हैं कि पुलिस हमें पकड़ नहीं सकती।” गिरफ्तारी न होने पर आत्मदाह की चेतावनी — सोशल मीडिया वीडियो वायरल युवती ने चेतावनी दी — “एक सप्ताह में गिरफ्तारी नहीं हुई तो IG ऑफिस के सामने आत्मदाह करूंगी।” इसके बाद पुलिस व प्रशासन में हलचल मची है। नया बड़ा खुलासा — SECL नौकरी पाने के लिए फर्जी पिता का नाम उपयोग करने का आरोप पीड़िता और ग्रामीणों ने दस्तावेज़ पेश कर दावा किया है कि दीनदयाल गुप्ता ने SECL में नौकरी पाने के लिए अपने पिता का नाम “समारू” दर्शाया, जबकि ग्राम चैनपुर दीपिका के असली समारू के तीन ही पुत्र हैं — गेंदराम, संतराम, बहोरन। दीनदयाल का नाम इनमें शामिल नहीं है। सवालों के घेरे में SECL की नियुक्ति प्रक्रिया क्या SECL की सर्विस बुक में भी “समारू” पिता का नाम लिखा है? क्या फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर PSU में नौकरी मिली? क्या यह सरकारी नौकरी हड़पने के लिए बनाई गई झूठी पहचान का मामला है? ग्रामीणों ने पुलिस और SECL प्रबंधन दोनों से फर्जी दस्तावेज़ों कीजांच, सत्यापन रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, और नई FIR दर्ज करने की मांग की है। ग्रामीणों का आक्रोश — “गरीब होते तो पुलिस उसी दिन पकड़ लेती… आखिर कितने में बिके अफसर?” गिरफ्तारी न होने से नाराज़ ग्रामीणों ने पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है: गरीब होते तो पुलिस 24 घंटे में कार्रवाई कर देती आरोपी SECL कर्मचारी होने का फायदा उठा रहा है थाना स्तर पर समझौता कराने का दबाव बनाया जा रहा है ग्रामीणों ने मांग की— “पूरे मामले की जांच रेंज स्तर की विशेष टीम से कराई जाए।” अब सबकी निगाहें SP कोरबा पर—क्या होगी ठोस कार्रवाई? क्या FIR के बाद SECL कर्मचारी की गिरफ्तारी होगी? क्या फर्जी पहचान वाले आरोप की जांच SECL करेगा? क्या थाना स्टाफ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी? क्या पीड़िता को संरक्षण मिलेगा? क्या आत्मदाह की चेतावनी को गंभीरता से लिया जाएगा? मामला लगातार तूल पकड़ रहा है और पीड़िता की सुरक्षा, न्याय और पुलिस की विश्वसनीयता—तीनों दांव पर हैं। मामला अब SECL, पुलिस विभागऔर प्रशासन—तीनों की साख की परीक्षा बन चुका है। Share this: Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to email a link to a friend (Opens in new window) Email Post navigation संगठन विस्तार का बिगुल — पत्रकारों के मुद्दों के समाधान को लेकर बड़ा संकल्प बेलसरी प्राइमरी स्कूल में छात्रा से अनुचित स्पर्श का मामला उजागर, सहायक शिक्षक निलंबित