कलेक्टर कार्यालय में पुलिस का डर! कर्मचारियों को जबरन बैठाने का आरोप बिना नोटिस, बिना सुनवाई… कर्मचारियों का निलंबन या प्रशासनिक तानाशाही? शांतिपूर्ण आंदोलन पर दमन? कलेक्टर की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल एमसीबी :- जिले के प्रशासनिक महकमे को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। पूर्व विधायक एवं छत्तीसगढ़ ट्रेड यूनियन काउंसिल के प्रांताध्यक्ष गुलाब कमरो ने एमसीबी जिले के कलेक्टर पर गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाते हुए मामले को सीधे देश और प्रदेश के शीर्ष स्तर तक पहुंचा दिया है,गुलाब कमरो ने इस संबंध में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग कार्मिक,लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय,नई दिल्ली,छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को विस्तृत शिकायती पत्र प्रेषित कर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।बड़ा सवालक्या शासन इस गंभीर शिकायत को केवल औपचारिकता तक सीमित रखेगा,या फिर प्रशासनिक जवाबदेही तय कर कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा? नज़रें अब शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग…पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मांग की है कि कलेक्टर,जिला एमसीबी द्वारा की गई समस्त कार्यवाहियों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोष सिद्ध होने पर कलेक्टर के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए,ताकि शासकीय कर्मचारियों को न्याय मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई की पुनरावृत्ति न हो। पद के दुरुपयोग और दमनात्मक कार्रवाई के आरोप शिकायती पत्र में पूर्व विधायक ने आरोप लगाया है कि कलेक्टर,जिला एमसीबी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शासकीय कर्मचारियों के विरुद्ध नियमविरुद्ध,एकतरफा और दमनात्मक कार्यवाही की गई। यह कार्रवाई न केवल शासकीय सेवा नियमों का उल्लंघन है,बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों के भी खिलाफ है। शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप गुलाब कमरो ने अपनी शिकायत में कलेक्टर पर निम्न गंभीर आरोप लगाए हैं शासकीय कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से मानसिक रूप से प्रताडि़त करना,कार्यालय परिसर में पुलिस बल बुलाकर भय और दबाव का माहौल बनाना,कर्मचारियों को कलेक्टर कार्यालय में जबरन बैठाकर रखना,शासन के नियमों के विरुद्ध बिना सुनवाई एकतरफा निलंबन आदेश जारी करना। हड़ताल समर्थन के दौरान का पूरा घटनाक्रम शिकायत के अनुसार, दिनांक 30 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ कर्मचारी/अधिकारी फेडरेशन (एस.सी.सी.) के पदाधिकारी गोपाल सिंह (व्यायाम शिक्षक), सुरेन्द्र प्रसाद (सफाई कर्मचारी) एवं संजय पाण्डेय (राजस्व निरीक्षक) तीन दिवसीय आंदोलन के दूसरे दिन हड़ताल के समर्थन में कलेक्टर कार्यालय,मनेंद्रगढ़ पहुंचे थे,गुलाब कमरो का स्पष्ट आरोप है कि संबंधित कर्मचारियों ने किसी भी प्रकार का दबाव, दुर्व्यवहार या अमर्यादित आचरण नहीं किया,बल्कि शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में कर्मचारियों से स्वेच्छा से आंदोलन में सहयोग का अनुरोध किया था इसके बावजूद कलेक्टर द्वारा पुलिस बल बुलाकर कर्मचारियों को लंबे समय तक बैठाए रखने,बाद में थाने ले जाकर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने जैसे कदम उठाए गए,जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक और दमनकारी हैं। बिना नोटिस निलंबन पर गंभीर सवाल शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित कर्मचारियों को न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया,न ही पूर्व सूचना दी गई,और न ही पक्ष रखने का अवसर दिया गया,इसके बावजूद एकतरफा निलंबन आदेश जारी कर दिए गए,जबकि संबंधित कर्मचारी एक मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी भी हैं। पूर्व विधायक ने इसे स्पष्ट रूप से नियमविरुद्ध बताया है। पूर्व मामलों का हवाला देकर सवाल गुलाब कमरो ने अपने शिकायती पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि इससे पहले संजय पाण्डेय के एक समान प्रकरण में निलंबन को निरस्त करते हुए निलंबन अवधि को कार्यावधि मानकर प्रकरण समाप्त किया जा चुका है, यह तथ्य पहले ही ऐसे निलंबन आदेशों की तथ्यहीनता और दुर्भावना को उजागर करता है। Share this: Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to email a link to a friend (Opens in new window) Email