कौन दे रहा संरक्षण? सोनहत में बेखौफ चल रहे अवैध ईंट भट्टे…!

जंगल कटे, कानून सुलगा — सोनहत में अवैध भट्टों की कहानी
ईंट भट्टा माफिया बनाम पर्यावरण, प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में…!

धुआं, राख और खामोशी — सोनहत में कानून क्यों बेअसर?
वन संपदा की लूट, ईंट भट्टों की आड़ में बड़ा खेल

सोनहत (सोनहत) : कोरिया जिले के सोनहत मुख्यालय सहित आसपास की कई ग्राम पंचायतों में इन दिनों अवैध ईंट भट्टों का संचालन खुलेआम किया जा रहा है। बिना किसी वैधानिक अनुमति के चल रहे इन भट्टों में जंगलों की लकड़ी और अवैध कोयले का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है, जिससे वनों के अस्तित्व और पर्यावरण संतुलन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सोनहत क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में कई ईंट भट्टे न तो पर्यावरणीय स्वीकृति के दायरे में आते हैं और न ही उनके पास वन विभाग या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति है। ईंट पकाने के लिए भारी मात्रा में अवैध रूप से काटी गई लकड़ियों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आसपास के जंगल तेजी से नष्ट हो रहे हैं। इसके साथ ही अवैध कोयले की आपूर्ति भी संदिग्ध खदानों और गैर-कानूनी माध्यमों से होने की आशंका जताई जा रही है। इन भट्टों से निकलने वाला घना धुआं और राख वायुमंडल में प्रदूषण को तेजी से बढ़ा रहा है। कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि के कारण क्षेत्र की जलवायु प्रभावित हो रही है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों, बच्चों और बुजुर्गों में श्वसन रोग, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने लगी हैं। खेतों और बस्तियों पर गिरने वाली राख से फसल और पेयजल स्रोतों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह पूरा अवैध कारोबार प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि सोनहत और आसपास के क्षेत्रों में संचालित सभी ईंट भट्टों की तत्काल जांच कराई जाए। भट्टों के संचालन की अनुमति, ईंधन के स्रोत और पर्यावरणीय नियमों के पालन की गहन जांच कर अवैध पाए जाने पर उन्हें तत्काल बंद किया जाए।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में जंगलों का बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाएगा और पर्यावरणीय संकट और गहराता जाएगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कब और कैसी कार्रवाई करता है।

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