करोड़ों की स्टाम्प‑ड्यूटी की चोरी, कूटरचित दस्तावेजों की आपराधिक गुत्थी रायपुर– एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने दिखा दिया कि कैसे एक नामी‑ कंपनी द्वारा वर्णित प्रक्रिया के पीछे संगठित धोखाधड़ी का रेला बिछा हुआ है।माधवी पांडे (डायरेक्टर, Alvin Cooper Pvt Ltd) की शिकायत के अनुसार, उनके नाम पर पंजीकृत यह कंपनी — मूलतः व्यवसायी थी जमीन के दर्ज कार्यों के माध्यम से सरकारी स्टाम्प‑ड्यूटी के मामलों में घोटाले का केंद्र बन गई है। कहा गया है कि करोड़ों रूपए की स्टाम्प‑ड्यूटी चोरी की गई होगी, और इसके लिए कूटरचित दस्तावेज़‑साजिश रची गई थी। क्या हुआ था? एक नजर में घटनाक्रम: आरोप है कि कंपनी ने किसी कर्मचारी की आड़ में ― जो नाम‑मात्र का नामांकन था ― राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी की। इसके बाद, संपत्ति‑रिसॉर्स नियामक प्रक्रिया को चकमा देकर बड़ी मात्रा में स्टाम्प‑ड्यूटी वसूली गई। शिकायत में यह भी बयान है कि “यह संगठित तरीके से की गई धोखाधड़ी है” एक संकेत कि यह एक व्यक्तिगत गैप नहीं, बल्कि समूहीय साजिश थी। प्रभाव और गंभीरता: अगर इन आरोपों में सच्चाई नज़र आए, तो इसके पीछे सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं बल्कि संपत्ति‑लेन‑देव की पारदर्शिता तथा शासन‑प्रशासन की जवाबदेही दोहरे संकट में पड़ जाएगी।क्योंकि जब सरकारी स्टाम्प‑ड्यूटी ही चोरी का माध्यम बन जाए, तो संपत्ति‑रजिस्ट्री का भरोसा टूटता है, सरकारी राजस्व धड़ाम करता है, और जनता का विश्वास झड़ता है। अब क्या होना चाहिए? राजस्व विभाग व आर्थिक अपराध शाखा तुरंत इस शिकायत की तत्काल जांच करे। संबंधित कंपनी के दस्तावेज, स्टाम्प‑ड्यूटी रसीदें, अभिलेख‑सूची और कर्मचारी‑संपर्क विवरण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किए जाएँ। आरोपितों पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए — ताकि यह सन्देश जाए कि “कानून के आगे कोई नहीं।” साथ ही, ऐसी जटिल वित्तीय गड़बड़ियों पर नियामकीय सुधार लाने की जरूरत है ताकि भविष्य में पुनरावृत्ति न हो। यह सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं यह संवहनीयता की परीक्षा, शासन‑पद्धति की क्षमता की चुनौती, और प्रत्येक नागरिक के अधिकार की जंग है।जब तक ऐसे मामलों में पारदर्शिता नहीं आएगी, और स्तर‑स्तर पर जवाबदेही नहीं होगी, तब तक संपत्ति‑लेन‑देव, स्टाम्प‑ड्यूटी व सरकारी रजिस्ट्रियों का भरोसा शब्दों में ही टूटता रहेगा। Share this: Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to email a link to a friend (Opens in new window) Email Post navigation “NDRF की पहल – जनजागरूकता से जनसुरक्षा की ओर कदम!” सात साल पुरानी फाइलों का तांडव: तीन-तीन आदेश, एक ही वसूली!…फाइलों से निकली ‘नई गड़बड़ी’, लेकिन बड़े अफसरों पर कार्रवाई शून्य…